डोकलाम पर Quote, संसद में हंगामा: Rahul vs Rajnath vs Shah

साक्षी चतुर्वेदी
साक्षी चतुर्वेदी

सोमवार को संसद का माहौल अचानक उस वक्त High Voltage Zone में बदल गया, जब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi ने चीन और डोकलाम का जिक्र कर दिया। मुद्दा सिर्फ एक बयान का नहीं था, बल्कि उसमें जुड़ा था पूर्व Army Chief मनोज नरवणे का नाम—और यहीं से बहस ने सियासी आग पकड़ ली।

Doklam का जिक्र और विवाद की चिंगारी

राहुल गांधी ने दावा किया कि पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज नरवणे ने अपने संस्मरणों में डोकलाम में Chinese tanks की मौजूदगी का उल्लेख किया है। राहुल के मुताबिक, यह संकेत था कि चीन भारतीय सीमा के बेहद करीब तक पहुंच चुका था।

बस, इतना सुनते ही सत्ता पक्ष की बेंचों से आपत्ति, शोर और टोकाटाकी शुरू हो गई। डोकलाम अब सिर्फ एक सीमा विवाद नहीं रहा, बल्कि संसद के भीतर Political Flashpoint बन गया।

Rajnath Singh का सीधा सवाल

रक्षा मंत्री Rajnath Singh तुरंत खड़े हुए और राहुल गांधी को सीधे घेर लिया। उनका सवाल साफ था, “जिस किताब का हवाला दिया जा रहा है, क्या वह प्रकाशित हुई भी है?”

रक्षा मंत्री ने कहा कि unpublished material के आधार पर संसद में इतने संवेदनशील दावे करना न केवल गैर-जिम्मेदाराना है, बल्कि House decorum के भी खिलाफ है।

Amit Shah की सख्त एंट्री

गृह मंत्री Amit Shah ने भी मोर्चा संभाला। उन्होंने राहुल गांधी की तुलना भाजपा सांसद Tejasvi Surya के भाषण से करने पर कड़ा ऐतराज जताया। शाह के मुताबिक, “Tejasvi Surya ने केवल पुराने राष्ट्रपति अभिभाषणों का संदर्भ दिया था, न कि किसी अप्रकाशित किताब का।”

यह बयान साफ संकेत था कि सरकार इस मुद्दे पर No Loose Talk Policy अपनाने के मूड में है।

Rahul Gandhi का आक्रामक पलटवार

आपत्तियों के बावजूद राहुल गांधी पीछे हटने को तैयार नहीं दिखे। उन्होंने तीखे अंदाज में कहा, “सरकार आतंकवाद से लड़ने की बात करती है, लेकिन एक कोट सुनने से डर जाती है।”

राहुल ने सवाल उछाला कि अगर उस किताब में कुछ भी गलत नहीं है, तो उसके जिक्र से संसद क्यों कांप रही है? यहीं से बहस Policy से Psychology की तरफ मुड़ गई।

Akhilesh यादव की Strategic एंट्री

बहस के बीच Samajwadi Party प्रमुख Akhilesh Yadav भी खड़े हुए। उन्होंने चीन मुद्दे को बेहद संवेदनशील बताते हुए कहा कि “अगर नेता प्रतिपक्ष इस पर बोलना चाहते हैं, तो उन्हें रोका नहीं जाना चाहिए।”

उन्होंने Dr. Lohia और Mulayam Singh Yadav का हवाला देते हुए चीन के प्रति सतर्कता को ऐतिहासिक ज़रूरत बताया।

Speaker Om Birla की सख्त नसीहत

हालात बिगड़ते देख लोकसभा अध्यक्ष Om Birla को हस्तक्षेप करना पड़ा। जब राहुल गांधी ने कहा, “आप ही बता दीजिए मैं क्या बोलूं”

तो स्पीकर का जवाब भी उतना ही साफ था, “मैं किसी का सलाहकार नहीं हूं, नियमों के तहत ही बोलिए।”

Doklam अब सिर्फ सीमा पर नहीं

यह पूरा घटनाक्रम दिखाता है कि China और Border Security जैसे मुद्दे संसद में आने वाले दिनों में और ज्यादा तीखे होने वाले हैं।
डोकलाम अब सिर्फ पहाड़ों में नहीं, बल्कि Parliamentary Politics के सेंटर स्टेज पर खड़ा है—जहां हर शब्द, हर कोट और हर किताब एक सियासी हथियार बन चुकी है।

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